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No matter how busy you may think you are, you must find time for reading, or surrender yourself to self-chosen ignorance. – Confucius

Mukti-path

a novel in Hindi by Abhai Maurya

मुक्ति-पथ में आज की ज्वलंत समस्याओं यानी दलितों, दमितों व शोषित समाज की  दशा और दिशा का मार्मिक चित्रण किया गया है। फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास मैला आंचल की भांति मुक्ति-पथ में भी यह साफ उभरकर आता है कि दुनिया में दो ही जातियां हैं: एक गरीब की और दूसरी अमीर की। दलित पात्र नफेसिंह की भांति स्वर्ण पात्र विजय, जो अत्यंत गरीब किसान परिवार से आता है, की  स्थिति भी दयनीय है। यही बात दोनों को एक-दूसरे के करीब लाती है जो आगे चलकर एक जुझारू एकजुटता में विकसित होती जाती है।

उपन्यास में दलितों, किसानों, महिलाओं के त्रासदीपूर्ण जीवन की ज्वलंत तस्वीर उभरकर आती है। पर दलित लेखकों के लेखन में छाए रहनेवाले मात्र दशा के चित्रण तक सीमित न रहते हुए मुक्ति-पथ में पहली बार दलित, दमित व नारी मुक्ति की संभावित दिशा को केंद्रीय विषय बनाया गया है।

युवा पीढ़ी, छात्र जीवन, विश्वविद्यालायों में होनेवाली उठा-पटक, जनतांत्रिक शक्तियों के संघर्ष का मर्म-स्पर्शी चित्रण के अतिरिक्त उपन्यास में मानव विरोधी शक्तियों के असली चेहरे को बखूबी बेनकाब किया गया है।

Title Mukti-path
Author Abhai Maurya
Language Hindi
Year 2015
Binding Paperback
Pages 256
ISBN 978-81-924967-3-3
Subject(s) Novel
List Price Soft Bound Price  150.00 + Postage
Direct purchase from the publisher Soft Bound Price  100/ + postage

Regular Price: Rs. 150/-
Sale Price (directly from publisher): Rs. 100/- + postage (paperback)
ISBN: 978-81-924967-3-3

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